UNESCO ने वाराणसी में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को अपनी विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल कर लिया है। यह फैसला 25 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित UNESCO विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में लिया गया।
इस फैसले के साथ सारनाथ भारत का 45वां UNESCO विश्व धरोहर स्थल बन गया है। सारनाथ वही पवित्र स्थान है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था।
✦ सारनाथ कहां स्थित है?
सारनाथ उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर से लगभग 10 किमी. उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में इसे ऋषिपत्तन, इसिपतन और मृगदाव जैसे नामों से भी उल्लेखित किया गया है।
सारनाथ बौद्ध धर्म के चार सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है:
- लुंबिनी: भगवान बुद्ध का जन्मस्थान
- बोधगया: जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ
- सारनाथ: जहां भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश दिया
- कुशीनगर: जहां भगवान बुद्ध को महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ
✦ सारनाथ का धार्मिक महत्व
भगवान गौतम बुद्ध को बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद वे सारनाथ पहुंचे और यहां अपने पांच पुराने साथियों को पहला उपदेश दिया। इस ऐतिहासिक घटना को धर्मचक्र प्रवर्तन यानी धर्म के चक्र को गति देना कहा जाता है।
इस उपदेश में भगवान बुद्ध ने चार आर्य सत्य, मध्यम मार्ग और आर्य अष्टांगिक मार्ग की शिक्षा दी थी। यहीं से बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बुद्ध की शिक्षाओं का संगठित रूप से प्रचार शुरू हुआ।
इसी कारण सारनाथ केवल एक पुरातात्त्विक स्थल नहीं, बल्कि दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था, शांति और आध्यात्मिक प्रेरणा का प्रमुख केंद्र है।
✦ UNESCO सूची में सारनाथ के कौन से भाग शामिल हैं?
सारनाथ को एक सीरियल विश्व धरोहर संपत्ति के रूप में UNESCO की सूची में शामिल किया गया है। इसमें दो प्रमुख भाग हैं:
1. चौखंडी स्तूप
चौखंडी स्तूप उस स्थान की स्मृति से जुड़ा है, जहां भगवान बुद्ध ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपने पांच पुराने साथियों से मिले थे। बाद में यही पांचों उनके प्रथम शिष्य बने।
2. सारनाथ के पुरातात्त्विक अवशेष
इस परिसर में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संरचनाएं शामिल हैं:
- धमेख स्तूप
- धर्मराजिका स्तूप
- मूलगंधकुटी विहार के अवशेष
- अशोक स्तंभ
- प्राचीन मंदिर और मठ
- छोटे पूजनीय स्तूप
- प्राचीन मूर्तियां और पुरातात्त्विक अवशेष
✦ सारनाथ के प्रमुख स्मारक
➦ धमेख स्तूप
धमेख स्तूप सारनाथ का सबसे प्रसिद्ध स्मारक है। इसे उस स्थान से संबंधित माना जाता है, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। इसकी विशाल बेलनाकार संरचना प्राचीन भारतीय वास्तुकला का शानदार उदाहरण है।
➦ चौखंडी स्तूप
चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके पहले पांच शिष्यों की मुलाकात से जुड़ा है। इसका प्रारंभिक निर्माण गुप्तकाल में हुआ था। बाद में मुगलकाल के दौरान इसके ऊपरी हिस्से में परिवर्तन किया गया।
➦ अशोक स्तंभ
मौर्य सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ई.पू. में सारनाथ में एक विशाल स्तंभ बनवाया था। इसके शीर्ष पर चार सिंहों की मूर्ति स्थापित थी।
इसी सारनाथ सिंह शीर्ष को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया। सिंह शीर्ष के नीचे बने धर्मचक्र से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के बीच स्थित अशोक चक्र की प्रेरणा ली गई है।
➦ धर्मराजिका स्तूप
धर्मराजिका स्तूप का निर्माण भी सम्राट अशोक से संबंधित माना जाता है। इसे भगवान बुद्ध के अवशेषों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनवाया गया था।
➦ सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय
सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1904 में हुई थी। इसे भारत के शुरुआती स्थल संग्रहालयों में गिना जाता है। यहां अशोक का सिंह शीर्ष, भगवान बुद्ध की प्राचीन मूर्तियां और खुदाई से मिली कई ऐतिहासिक वस्तुएं सुरक्षित रखी गई हैं।
✦ 28 साल बाद मिली UNESCO की मान्यता
सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद भारत सरकार ने जनवरी 2025 में 2025–26 नामांकन चक्र के लिए इसका औपचारिक प्रस्ताव विश्व धरोहर समिति को भेजा।
प्रस्ताव जमा होने के बाद लगभग 18 महीने तक सारनाथ के इतिहास, संरक्षण व्यवस्था, वास्तुकला और पुरातात्त्विक महत्व का तकनीकी मूल्यांकन किया गया।
ICOMOS के विशेषज्ञों ने सारनाथ का निरीक्षण किया। सभी आवश्यक जांच और तकनीकी बैठकों के बाद 25 जुलाई 2026 को इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
✦ किन मानदंडों के आधार पर हुआ चयन?
सारनाथ को UNESCO के सांस्कृतिक मानदंड (iii) और (vi) के अंतर्गत चुना गया है।
➦ मानदंड (iii)
सारनाथ बौद्ध सभ्यता, मठ परंपरा और धार्मिक वास्तुकला का असाधारण प्रमाण प्रस्तुत करता है। यहां मौजूद स्तूपों, विहारों और मंदिरों से बौद्ध धर्म के लंबे इतिहास की जानकारी मिलती है।
➦ मानदंड (vi)
सारनाथ का संबंध भगवान बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से एक है। इनमें अपने पहले पांच शिष्यों से मिलना और पहला उपदेश देना प्रमुख है।
✦ उत्तर प्रदेश का चौथा UNESCO विश्व धरोहर स्थल
सारनाथ उत्तर प्रदेश का चौथा UNESCO विश्व धरोहर स्थल बन गया है। उत्तर प्रदेश में अब चार विश्व धरोहर स्थल हैं:
- ताजमहल, आगरा—1983
- आगरा किला—1983
- फतेहपुर सीकरी—1986
- प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ—2026
सारनाथ के शामिल होने के बाद भारत में कुल 45 विश्व धरोहर स्थल हो गए हैं। इनमें 37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और एक मिश्रित धरोहर स्थल शामिल है।
भारत अब सर्वाधिक विश्व धरोहर स्थलों वाले देशों में विश्व स्तर पर छठे और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।

