Army Study icon Image

By: Army Study

On: September 10, 2026

Follow

UNESCO Tentative List 2026: भारत की 4 नई सांस्कृतिक साइटें शामिल, कुल संख्या 73

भारत की 4 नई सांस्कृतिक साइटों को UNESCO की विश्व धरोहर संभावित सूची (UNESCO Tentative List 2026) में शामिल किया गया है। इन चार नई साइटों के जुड़ने के बाद भारत की इस सूची में कुल 73 साइटें हो गई हैं। खास बात यह है कि इस बार शामिल की गई 4 नई साइटें सांस्कृतिक श्रेणी से संबंधित हैं।

इन 4 नई साइटों में असम का रंगपुर–शिवसागर ऐतिहासिक समूह, अंडमान द्वीप समूह का औपनिवेशिक दंड उपनिवेश, निकोबार द्वीप समूह की निकोबारी सांस्कृतिक निरंतरता और राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के चित्रित हवेली नगर शामिल हैं।


✦ रंगपुर-शिवसागर ऐतिहासिक समूह, असम

Rangpur–sivasagar historic ensemble in assam featuring the historic rang ghar from the ahom period.

रंगपुर–शिवसागर ऐतिहासिक समूह असम के शिवसागर जिले में स्थित है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से अहोम राजवंश से जुड़ा हुआ है। अहोम शासकों ने लंबे समय तक असम और ब्रह्मपुत्र घाटी के बड़े हिस्से पर शासन किया था। शिवसागर उनके शासन का एक प्रमुख राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा था।

इस जगह आज भी अहोम काल की कई महत्वपूर्ण इमारतें और जलाशय मौजूद हैं। इनमें रंग घर, तलातल घर, नामडांग पत्थर पुल, शिवसागर तालाब, जोयसागर और गौरीसागर प्रमुख हैं। इन स्मारकों से उस समय की स्थापत्य कला और जल प्रबंधन व्यवस्था के बारे में जानकारी मिलती है। इससे यह भी पता चलता है कि अहोम शासकों ने नगर निर्माण और जल संरक्षण पर काफी ध्यान दिया था।

असम से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य चराइदेव मोइदाम है। चराइदेव के मोइदाम भी अहोम राजवंश से जुड़े हुए हैं और इन्हें 2024 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सूचि में स्थान मिला।


✦ अंडमान द्वीप समूह का औपनिवेशिक दंड उपनिवेश

Historic cellular jail representing the colonial penal settlement of the andaman islands in port blair.

UNESCO की संभावित सूची में शामिल दूसरी महत्वपूर्ण साइट अंडमान द्वीप समूह का औपनिवेशिक दंड उपनिवेश है। यह स्थान भारत के स्वतंत्रता संग्राम और ब्रिटिश शासन की दंड व्यवस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने कई भारतीय कैदियों और स्वतंत्रता सेनानियों को अंडमान भेजना शुरू किया था, ताकि उन्हें भारत की मुख्य भूमि से दूर रखा जा सके।

इस विरासत क्षेत्र में चैथम द्वीप, वाइपर द्वीप, नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप और सेलुलर जेल शामिल हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध स्थान सेलुलर जेल है, जो पोर्ट ब्लेयर में स्थित है। इसे आमतौर पर काला पानी के नाम से भी जाना जाता है। यहां अनेक भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को कैद किया गया था और उन्हें कठोर सजा दी जाती थी।

आज जिस द्वीप को नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप कहा जाता है, उसका पुराना नाम रॉस द्वीप था। ब्रिटिश शासन के दौरान यह प्रशासनिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।


✦ निकोबारी सांस्कृतिक निरंतरता, निकोबार द्वीप समूह

Traditional lifestyle and cultural heritage of the nicobarese community in the nicobar islands.

तीसरी नई साइट निकोबारी सांस्कृतिक निरंतरता से जुड़ी है। यह निकोबार द्वीप समूह के नानकोवरी समूह में स्थित है। इस क्षेत्र में ट्रिंकेट, काचल, चौरा, तेरेसा, कामोर्ता, नानकोवरी और बम्पोका जैसे सात द्वीप शामिल हैं।

इस साइट की सबसे खास बात कोई महल, मंदिर या किला नहीं है, बल्कि यहां रहने वाले निकोबारी समुदाय की जीवित सांस्कृतिक परंपरा है। निकोबारी लोग लंबे समय से इन द्वीपों पर रहते आए हैं और उनका जीवन समुद्र, जंगल, तटीय क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है। उनकी पारंपरिक जीवनशैली, त्योहार, सामाजिक नियम, स्थानीय ज्ञान और रीति-रिवाज पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते रहे हैं।इसी कारण इस क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण जीवित सांस्कृतिक विरासत माना जाता है।


✦ शेखावाटी के चित्रित हवेली नगर, राजस्थान

Traditional painted havelis of shekhawati in rajasthan featuring colorful frescoes and historic architecture.

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियां अपनी सुंदर बनावट और रंगीन भित्ति चित्रों के कारण बहुत प्रसिद्ध हैं। अब शेखावाटी के चित्रित हवेली नगरों को भी UNESCO की विश्व धरोहर संभावित सूची में शामिल किया गया है। शेखावाटी क्षेत्र मुख्य रूप से सीकर, झुंझुनू और चूरू जिलों में फैला हुआ है।

यहां की बड़ी हवेलियों का निर्माण मुख्य रूप से 18वीं से 20वीं शताब्दी के बीच संपन्न मारवाड़ी व्यापारी परिवारों ने करवाया था। इन हवेलियों की दीवारों पर बने रंगीन भित्ति चित्र उनकी सबसे बड़ी पहचान हैं। इन चित्रों में देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, स्थानीय जीवन, व्यापार, पशु-पक्षियों और समाज में होने वाले बदलावों को दिखाया गया है।

बाद के समय में कई हवेलियों की दीवारों पर रेलगाड़ी, हवाई जहाज और अन्य आधुनिक साधनों के चित्र भी बनाए गए। इस प्रस्ताव में शेखावाटी के 14 ऐतिहासिक शहर और कस्बे शामिल हैं, जिनमें अलसीसर, बिसाऊ, चिड़ावा, चूरू, डूंडलोद, फतेहपुर, झुंझुनू, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, मंडावा, महांसर, नवलगढ़, रामगढ़ और सीकर शामिल हैं। अपनी सुंदर चित्रित हवेलियों के कारण शेखावाटी को अक्सर खुले आकाश की कला दीर्घा भी कहा जाता है।


UNESCO की संभावित सूची क्या होती है?

UNESCO की संभावित सूची में उन स्थलों को रखा जाता है जिन्हें कोई देश भविष्य में विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामांकित करना चाहता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि किसी जगह का नाम संभावित सूची में आने के बाद वह तुरंत विश्व धरोहर स्थल बन जाती है। सबसे पहले उसे संभावित सूची में शामिल किया जाता है। इसके बाद उस स्थल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या प्राकृतिक विशेषताओं से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार की जाती है। फिर उसका मूल्यांकन किया जाता है और अंत में विश्व धरोहर समिति तय करती है कि उस स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा दिया जाए या नहीं।


✦ भारत की संभावित सूची में कुल कितनी साइटें हैं?

इन 4 नई सांस्कृतिक साइटों के जुड़ने के बाद भारत की UNESCO विश्व धरोहर संभावित सूची में कुल 73 साइटें हो गई हैं। इनमें 53 सांस्कृतिक, 17 प्राकृतिक और 3 मिश्रित साइटें शामिल हैं। सितंबर 2026 में शामिल की गई सभी 4 नई साइटें सांस्कृतिक श्रेणी से संबंधित हैं।


✦ UNESCO से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

UNESCO का मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है और विश्व धरोहर सम्मेलन 1972 में अपनाया गया था। भारत की संभावित सूची में अब कुल 73 साइटें हैं। 2026 में शामिल की गई 4 नई साइटें सांस्कृतिक श्रेणी की हैं।


Leave a Comment