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By: Army Study

On: October 1, 2025

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BrahMos missile: भारत का गर्व, स्वदेशी शक्ति का प्रतीक

ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइलों में से एक, ब्रह्मोस न केवल भारत की तकनीकी क्षमता और रणनीतिक सोच का प्रतीक है, बल्कि यह Make in India और आत्मनिर्भर भारत अभियानों की सफलता को भी प्रमाणित करता है। 75% से अधिक स्वदेशी घटकों के साथ निर्मित यह मिसाइल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा को भी बढ़ा रही है।

✦ ब्रह्मोस मिसाइल की मुख्य विशेषताएँ

  • संयुक्त उद्यम: 1998 में भारत के DRDO और रूस की NPO Mashinostroyeniya के सहयोग से स्थापित।
  • नामकरण: भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मॉस्कवा नदी से नाम लिया गया।
  • गति: अधिकतम Mach 2.8–3+ (ध्वनि की गति से तीन गुना तेज)।
  • रेंज: शुरुआती रेंज 290 किमी थी, जो अब बढ़कर 800+ किमी तक पहुँच चुकी है।
  • दो चरणीय प्रणोदन:
    • पहला चरण: ठोस ईंधन बूस्टर
    • दूसरा चरण: तरल ईंधन रैमजेट इंजन
  • फायर एंड फॉरगेट तकनीक: लॉन्च के बाद अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं।
  • स्टील्थ डिज़ाइन: कम रडार सिग्नेचर (Low RCS) के कारण दुश्मन के राडार पर पकड़ में आना मुश्किल।
  • सटीक प्रहार क्षमता: केवल 1 मीटर CEP (Circular Error Probable) के साथ उच्च सटीकता।
  • मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च क्षमता: भूमि, समुद्र, वायु और पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है।
  • कई उड़ान प्रोफ़ाइल: समुद्र की सतह से केवल 10 मीटर ऊपर तक उड़ने और सीधी गोता मारने की क्षमता।
  • वारहेड क्षमता: 200–300 किग्रा तक के पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम।
  • ब्रह्मोस-NG (Next Generation): हल्का, छोटा और ज्यादा प्लेटफॉर्म-फ्रेंडली संस्करण।
  • ब्रह्मोस-II (Hypersonic): Mach 7–8 गति वाला हाइपरसोनिक संस्करण, जो भविष्य में दुश्मन की किसी भी रक्षा प्रणाली को अप्रभावी बना सकता है।ब्रह्मोस मिसाइल की निर्माण इकाइयाँ

✦ ब्रह्मोस मिसाइल की निर्माण इकाइयाँ

आज ब्रह्मोस के 75% घटक भारत में निर्मित हो रहे हैं। प्रमुख निर्माण स्थल और योगदान इस प्रकार हैं:

घटक / सामग्रीस्थान
स्टील शीट्स व प्लेट्सहिसार, हरियाणा
विस्फोटक सामग्रीसिंगरौली, मध्य प्रदेश
एयरफ़्रेम व संरचनामुंबई, हैदराबाद
राडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टमबेंगलुरु
असेंबली कार्यहैदराबाद, नागपुर
समापन परीक्षण उपकरण (COE)चेन्नई
नई निर्माण इकाईलखनऊ, उत्तर प्रदेश रक्षा कॉरिडोर

लखनऊ ब्रह्मोस उत्पादन इकाई

  • लागत: 300 करोड़ रुपये
  • स्थान: उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत लखनऊ
  • क्षमता: हर साल 100-150 नई पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन
  • विशेषताएँ:
    • नए संस्करण का वजन 2900 किग्रा से घटकर 1290 किग्रा
    • रेंज 300 किमी से अधिक

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

  • उद्देश्य: रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और आयात पर निर्भरता कम करना।
  • 6 नोड्स: अलीगढ़, आगरा, कानपुर, चित्रकूट, झांसी, लखनऊ।
  • नोडल एजेंसी: UPEIDA
  • लक्ष्य: यूपी को रक्षा उत्पादन का वैश्विक हब बनाना।

✦ भारत की रक्षा रणनीति में ब्रह्मोस मिसाइल की अहम भूमिका –

  1. तेज़ और सटीक: उच्च गति व सटीकता से प्रहार।
  2. मल्टीप्लेटफ़ॉर्म उपयोग: भूमि, वायु, समुद्र, पनडुब्बी से लॉन्च क्षमता।
  3. आत्मनिर्भरता: रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीक का विस्तार।
  4. उन्नत संस्करण: ब्रह्मोस-ER और ब्रह्मोस-NG विकासाधीन।
  5. राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान: भारत की सामरिक शक्ति को बढ़ाना।

भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को विकसित किया है। यह मिसाइल न केवल दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी शक्ति और वैश्विक रक्षा सहयोग का भी प्रतीक है।

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