ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइलों में से एक, ब्रह्मोस न केवल भारत की तकनीकी क्षमता और रणनीतिक सोच का प्रतीक है, बल्कि यह Make in India और आत्मनिर्भर भारत अभियानों की सफलता को भी प्रमाणित करता है। 75% से अधिक स्वदेशी घटकों के साथ निर्मित यह मिसाइल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा को भी बढ़ा रही है।
✦ ब्रह्मोस मिसाइल की मुख्य विशेषताएँ
- संयुक्त उद्यम: 1998 में भारत के DRDO और रूस की NPO Mashinostroyeniya के सहयोग से स्थापित।
- नामकरण: भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मॉस्कवा नदी से नाम लिया गया।
- गति: अधिकतम Mach 2.8–3+ (ध्वनि की गति से तीन गुना तेज)।
- रेंज: शुरुआती रेंज 290 किमी थी, जो अब बढ़कर 800+ किमी तक पहुँच चुकी है।
- दो चरणीय प्रणोदन:
- पहला चरण: ठोस ईंधन बूस्टर
- दूसरा चरण: तरल ईंधन रैमजेट इंजन
- फायर एंड फॉरगेट तकनीक: लॉन्च के बाद अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं।
- स्टील्थ डिज़ाइन: कम रडार सिग्नेचर (Low RCS) के कारण दुश्मन के राडार पर पकड़ में आना मुश्किल।
- सटीक प्रहार क्षमता: केवल 1 मीटर CEP (Circular Error Probable) के साथ उच्च सटीकता।
- मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च क्षमता: भूमि, समुद्र, वायु और पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है।
- कई उड़ान प्रोफ़ाइल: समुद्र की सतह से केवल 10 मीटर ऊपर तक उड़ने और सीधी गोता मारने की क्षमता।
- वारहेड क्षमता: 200–300 किग्रा तक के पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम।
- ब्रह्मोस-NG (Next Generation): हल्का, छोटा और ज्यादा प्लेटफॉर्म-फ्रेंडली संस्करण।
- ब्रह्मोस-II (Hypersonic): Mach 7–8 गति वाला हाइपरसोनिक संस्करण, जो भविष्य में दुश्मन की किसी भी रक्षा प्रणाली को अप्रभावी बना सकता है।ब्रह्मोस मिसाइल की निर्माण इकाइयाँ
✦ ब्रह्मोस मिसाइल की निर्माण इकाइयाँ
आज ब्रह्मोस के 75% घटक भारत में निर्मित हो रहे हैं। प्रमुख निर्माण स्थल और योगदान इस प्रकार हैं:
| घटक / सामग्री | स्थान |
|---|---|
| स्टील शीट्स व प्लेट्स | हिसार, हरियाणा |
| विस्फोटक सामग्री | सिंगरौली, मध्य प्रदेश |
| एयरफ़्रेम व संरचना | मुंबई, हैदराबाद |
| राडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम | बेंगलुरु |
| असेंबली कार्य | हैदराबाद, नागपुर |
| समापन परीक्षण उपकरण (COE) | चेन्नई |
| नई निर्माण इकाई | लखनऊ, उत्तर प्रदेश रक्षा कॉरिडोर |
❖ लखनऊ ब्रह्मोस उत्पादन इकाई –
- लागत: 300 करोड़ रुपये
- स्थान: उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत लखनऊ
- क्षमता: हर साल 100-150 नई पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन
- विशेषताएँ:
- नए संस्करण का वजन 2900 किग्रा से घटकर 1290 किग्रा
- रेंज 300 किमी से अधिक
❖ उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर –
- उद्देश्य: रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और आयात पर निर्भरता कम करना।
- 6 नोड्स: अलीगढ़, आगरा, कानपुर, चित्रकूट, झांसी, लखनऊ।
- नोडल एजेंसी: UPEIDA
- लक्ष्य: यूपी को रक्षा उत्पादन का वैश्विक हब बनाना।
✦ भारत की रक्षा रणनीति में ब्रह्मोस मिसाइल की अहम भूमिका –
- तेज़ और सटीक: उच्च गति व सटीकता से प्रहार।
- मल्टीप्लेटफ़ॉर्म उपयोग: भूमि, वायु, समुद्र, पनडुब्बी से लॉन्च क्षमता।
- आत्मनिर्भरता: रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीक का विस्तार।
- उन्नत संस्करण: ब्रह्मोस-ER और ब्रह्मोस-NG विकासाधीन।
- राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान: भारत की सामरिक शक्ति को बढ़ाना।
भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को विकसित किया है। यह मिसाइल न केवल दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी शक्ति और वैश्विक रक्षा सहयोग का भी प्रतीक है।

