✦ अग्निवीर भर्ती में हर साल 1 लाख युवा होंगे शामिल
भारतीय सेना ने एक बड़ा फैसला करते हुए Agniveer Bharti 45–50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख से ज्यादा प्रति वर्ष करने की योजना बनाई है। इस समय भारतीय सेना में करीब 1.8 लाख सैनिकों की कमी है। कोविड-19 के दौरान 2020 और 2021 में भर्ती पूरी तरह बंद रही, लेकिन उन दो वर्षों में हर साल 60–65 हजार सैनिक रिटायर होते रहे। भर्ती रुकने और रिटायरमेंट जारी रहने की वजह से खाली पदों की संख्या बहुत बढ़ती गई, जिसे अब सेनिक भर्ती संख्या बढ़ा कर भरपाई की जाने की योजना है।
अग्निपथ योजना, जो जून 2022 में शुरू हुई, उसके तहत हर साल लगभग 45–50 हजार अग्निवीर भर्ती किए जा रहे थे। लेकिन अब इस संख्या को बढ़ाकर 1 लाख+ प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव है, जिसकी शुरुआत 2025 से हो सकती है। यह बदलाव इसलिए जरूरी है क्योंकि 2026 के अंत से पहला अग्निवीर बैच 4 साल की सेवा पूरी करके बाहर होगा, और उनमें से सिर्फ 25% को ही स्थायी सेना में शामिल किया जाएगा। अगर भर्ती नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले समय में कमी और बढ़ जाएगी।
सेना ने बताया है कि यह भर्ती बढ़ाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे और पूरी योजना बनाकर लागू की जाएगी, ताकि रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर्स की क्षमता पर दबाव न पड़े और प्रशिक्षण की गुणवत्ता पूरी तरह कायम रहे। इस पूरी रणनीति का लक्ष्य है कि अगले 3–5 सालों में सैनिकों की कमी पूरी तरह खत्म हो सके और सेना की ताकत, तैयारी और ऑपरेशनल क्षमता और मजबूत हो सके। सेना ने कहा है कि वैकेंसी हर साल जरूरत और स्थिति के अनुसार जारी की जाएगी, लेकिन लक्ष्य है कि इतिहास में सबसे बड़ी भर्ती करके कमी को पूरी तरह खत्म किया जाए।
✦ अग्निवीर भर्ती 1 लाख करने के मुख्य कारण
1. कोविड के दौरान भर्ती रोकी जाने से कमी बढ़ी
2020 और 2021 में भर्ती रुकने के बावजूद हर साल लगभग 60–65 हजार सैनिक रिटायर होते रहे, जिससे बड़ी कमी बन गई।
2. 2026 से पहली अग्निवीर बैच की सेवा समाप्त
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीर 4 साल की सेवा पूरी कर 2026 के अंत से बाहर होना शुरू करेंगे।
इनमें से केवल 25% युवाओं को नियमित सेवा का मौका मिलेगा।
✦ अग्निपथ योजना के मुख्य बिंदु
- योजना शुरू: जून 2022
- पहले चरण में भर्ती: करीब 46 हजार पद
- 2022-2025 के बीच: लगभग 1.75 लाख अग्निवीर भर्ती का लक्ष्य
- नियमित सेवा में चयन: लगभग 25% योग्य उम्मीदवार
भारतीय सेना की इस रणनीति से लाखों युवाओं को देश सेवा का बड़ा अवसर मिलेगा और सेना की मैनपावर क्षमता भी मजबूत होगी।

