UNESCO ने भारत के प्रमुख त्योहार दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत भारत (UNESCO Intangible Cultural Heritage India) की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया है। यह घोषणा 10 दिसंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले में आयोजित UNESCO की 20वीं अंतर-सरकारी समिति के सत्र में की गई।
✦ UNESCO ने दीपावली को सूची में क्यों शामिल किया?
1. वैश्विक सांस्कृतिक महत्व
- दीपावली केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मनाया जाता है।
- यह प्रकाश, आध्यात्मिकता, सद्भाव और अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
2. सांस्कृतिक विविधता का उत्सव
- हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध समुदाय इस त्योहार को अपने-अपने रूप में मनाते हैं।
- UNESCO ने इसे बहु-जातीय और बहु-सांस्कृतिक उत्सव बताया।
3. भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती
- दीपावली भारत की सदियों पुरानी परंपराओं और मूल्यों को दुनिया तक पहुंचाती है।
- इससे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती मिलेगी।
✦ कैसे हुआ दीपावली UNESCO की सूची में शामिल होने की प्रक्रिया?
दीपावली को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने का सफर 2023 में शुरू हुआ, जब भारत सरकार ने इसका आधिकारिक नामांकन प्रस्ताव भेजा। इसके बाद 2024 से 2025 तक UNESCO की विशेषज्ञ समिति ने दीपावली से जुड़ी परंपराओं, इसके सांस्कृतिक महत्व, समाज पर इसके सामाजिक प्रभाव, और भारतीय समुदायों के जीवन में इसकी भूमिका का गहराई से अध्ययन किया। सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा और मूल्यांकन के बाद समिति ने इसे सूची में शामिल करने पर सहमति जताई। 10 दिसंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले में आयोजित UNESCO की 20वीं अंतर-सरकारी समिति के सत्र में दिवाली को औपचारिक रूप से मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित किया गया।
✦ भारत के 15 तत्व जो पहले से UNESCO ICH सूची में शामिल हैं
दीपावली के शामिल होने के बाद भारत की संख्या 16 हो गई है। पहले से सूची में शामिल प्रमुख तत्व:
- वैदिक जप की परंपरा (2008) – भारतव्यापी
- रामलीला – रामायण का पारंपरिक प्रदर्शन (2008) – उत्तर प्रदेश
- कुटियाट्टम – संस्कृत थिएटर (2008) – केरल
- राममन – गढ़वाल हिमालय का धार्मिक उत्सव व अनुष्ठान नाटक (2009) – उत्तराखंड
- मुदियेट्टू – अनुष्ठान थिएटर व नृत्य नाटक (2010) – केरल
- कालबेलिया लोक गीत और नृत्य (2010) – राजस्थान
- छऊ नृत्य (2010) – झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल
- लद्दाख का बौद्ध जप (2012) – लद्दाख
- संकीर्तन – मणिपुर का अनुष्ठान गायन, ढोल और नृत्य (2013) – मणिपुर
- जंडियाला गुरु के ठठेरे – पीतल और तांबे के बर्तन निर्माण का शिल्प (2014) – पंजाब
- योग (2016) – भारतव्यापी
- नवरोज़ (2016) – भारतव्यापी (पारसी समुदाय)
- कुंभ मेला (2017) – उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश आदि
- दुर्गा पूजा (कोलकाता) (2021) – पश्चिम बंगाल
- गरबा (2023) – गुजरात
- दिवाली (दीपावली) (2025) – भारतव्यापी


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